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मेरे नाथ मेरे साथ

11th September,2007

!! मेरे नाथ मेरे साथ !!

प्यारा पाला नाथ ने,
लिए गोद उठाए ।
जातिभुत् होए के,
नीचे मिट्टी में मिल जाए ।
कामनाभुत् होए के,
कुकुर् जाति हो जाए ।
नाथ् बांधा डोर से,
लिए पास बिठाये ।

……….
…………………परम लौ

Darpan

Here is an extract from my poem “Darpan”

CHEHAREY TO NAQABPOSH HOTEY HAI
SAU RANG BADALTEY HAIN
HOTHON PE JO SHABAD UKREY HAIN
ROOH KA NAKSHA BAYAN KARTEY HAIN
……. “LoweMohyal”

चेहरे तो नकाबपोश होते हैं ,

सौ रंग बदलते हैं ।

होठों  पर जो शब्द उकरे हैं,

रूह   का नक्शा ब्यान करते हैं।  …… लौ मोहियाल

Copyright © Param Lowe