देव वानी » मेरे बारे में
देव वानी

यदि आपने येह् ब्लाग पढा और आपको ईस ब्लाग में व्याप्त आधियात्मिक शक्ति का
आभास भी हुआ, तो आपने दोस्तों को अवश्य बतलाऐं।
अपने दोस्तों और साथीयों को बताने के लिए     यहां कल्कि करें।
क्योंकि ग्यान को अपने तक सिमित रखना भी एक अपराध है।


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मेरे बारे में

मन तो घबराता ही है जो कवितएं और फ़िल्मी गाने किसी सुन्दरी के सौन्दर्य का आभास कराते हैं जब वे ही भगवान का आभास कराने लग जाए तो मन तो घभराएगा ही। मैं अपना पुरुषत्व छोडने का साहस नही कर सकता। ईस लिए अब थोडा बच बच कर चलता हूं। संत लोग कहेंगे कि प्रभु प्रेम के आगे यह बलिदान तो कुछ भी नही। मुझे भी ईस बात का एहसास हुआ पर अभी भी मैं स्त्री के प्रति पुरुष भाव को रखते हुए चलना चाह्ता हूँ। बाकि नाथ आप ही थामेंगे ……

…..मैं मुर्खतापुर्ण प्रश्न पूछता रहिता हूं और नाथजी ग्यान देते रहिते हैं…. सबसे बडी मु्र्खता मानव यह करतें हैं जब वे समझते हैं कि वे सब कुछ जानते हैं| जोकोई व्यक्ति सच्चे भाव से मेरे बारे में कोई बात कहिता है तो वह बात मुझ तक पहुंच जाती है और जबकि मैं एक साधारण मानव हूं | तो सोचो यदि तुम सच्चे भाव से भगवान की सतुति करोगे तो क्या भगवान को सुनाई नही देगी| देगी और देती है | जय श्री हरि विष्णु ||

मेरी कविता - कैसे पाऊं प्यारे घनश्याम को !!

मुझे जानने के लिए मेरी कविताऐं पढें |

परम लौ ?

लौ” - क्या अंग्रेज हुं? क्या ईसाई हुं?
जाने लौ मोहियाल ब्राह्म्णों के बारे में
मोहियाल ब्राह्म्णों के बारे में जाने

स्वयं पर कविता - परम लौ
!! परम लौ !!
संवेदन मन का धारक हूं,
स्यं वेदन का कारक हूं,
स्वंभू को साधक हूं,
परा भू को अंश,
परम लौ को चातक हूं,

………………
Feb 2, 2009

नाथ दीजो नाम मुझे आपनो, मैं बलिहारी जाऊं।
हरि कहे मन हरा होजाए, मैं बलिहारी जाऊं।
जगह जगह नाथ रंग लीपो, मैं बलिहारी जाऊं।
भरमायाजाउं, नाथ बांह पकड खीचं लीजो,
मैं बलिहारी जाउं।
……………..
परम लौ
……………..

April 9th, 2009
“कुछ लोग घर से निकलते हैं,
खुदा का खून बहाने को,
ऐ ऱब्ब कोई इन्सां भी निकले कभी,
इन्सां से फ़रीशता हो जाने को !”
………… परम लौ

Nasihat Param Lowe's Hindi poem Poetry

January 29 2008 04:12 am



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