माया का आमन्त्रण
माया का आमन्त्रण
हां भई माया आमन्त्रण देती है ऑर मैं चल देता हूं उसके पीछे - पीछे| ये माया कोन है भई? अरे क्या बात कर रहे हो माया को नही जानते| नही नही मैं कामवाली बाई की बात नही कर रहा हूं, ये बात अलग है कि माया कामवाली बाई है मेरे यहां| वाकई वो बहुत कर्मठ है| शायद पेट की भूख ईन्सां को कर्मठ बना ही देती है| अब माया गुस्सा हो रही है कि मैं उसे एक कामवाली बाई के साथ तुलनात्मक श्रेणी में ले आया| वो खडी गालियां दे रही है कोई बात नही वो दो पल बाद फिर आएगी नये वस्त्र, नये आभूषण और नया और ज्यादा कामुक सोन्दर्य लेकर मुझेसे समर्पण करवाने| हां यह एक खेल है जिसमें मै और माया दो खीलाडी है| अब माया फिर से नाराज़ हो गई | वो गालियां देते हुए कह रही है कि “तुम एक साधारण मुनुष्य मेरे साथ अपनी तुल्ना करने का दुस्साह्स कैसे कर सकते हो | मैं चाहूं तो तुम्हे एक पल मैं स्वाहा कर दूं |” और वो गालियां देते हुए चली गई| फिर आएगी नये वस्त्र……
मायाऐं कई हैं ये गालियां देने वाली माया कलिकामाः की माया है| ईसी प्रकार और रुपॉं में भी माया पाई जाती है| जैसे ऐश्वर्या नाम की (हे राम ! बच्चन की पुत्रवधु नही) भी एक जो श्री लक्ष्मीनारायण की दासी है|ब्रह्मा जी दो दासीयां सु-बुद्धि और कू-बुद्धि दो मायाऐं है
तो माया ने कॉनसा आमन्त्रण दिया?…….
February 09 2008 05:38 am | आस्था and जीवन and मेरी अपनी



