माराठी मानस ने जन्मा क्षेत्रीयवादता का राक्षस
ईन्द्र्लोक, वसन्त मास पश्चिम देशा तिथी १० फरवरी, सन २००८
माराठी मानसों ने जन्मा क्षेत्रीयवादता का राक्षस |देवता भी डर गये हिन्दुऑ में पनपते क्षेत्रीयवादता के राक्षस से | अब देवतागण ईक्त्र होकर सभा करने में जुटे हैं कि जिस प्रकार देव पुत्र निजी स्वार्थो के चलते क्षेत्रीयवादता के राक्षस को जन्म देकर उसका लालन-पालन करने में जुटे है तो वह स्मय आगया है कि देवताऑ को अपने अपने प्राण प्रतिश्टित स्थानो को छोड स्वर्गलोक लोट जाना चाहिए | सबसे पहिले सिध्दिविनायक के रुप में स्थापित गणपती कहने लगे की “मैं तो चला कैलाश| आब मांगने दो ईनको माराठी में वरदान प्थर की मुर्ती से” और वे अलोप हो गये| उनके बाद श्री राम रुप मे पुरुषोत्म रगुपति ने कहा “मैं तो स्पष्टरुप से आयोधया वासी हूं| यानि के उत्तर भारतीय हूं| ईससे पहिले कि ये लोग मुझे भी उत्तरप्रदेश का भईया कहने लगें, मै तो सिया और लछम्ण के संग आयोधया चला|” और वे अलोप हो गये| ईस प्रकार बजरंगबली और सभी देवी देवता महाराष्ट्रा को त्याग कर अपने अपने मूल स्थान को लोट गए|
अब भई माराठी भाईयो तुम अपनी प्रार्थनाऐं राज ठाकरे के सामने रख्नना वो अपनी क्षमता से पूरा करे|
February 10 2008 04:27 am | आस्था and जीवन and धरती and मेरी अपनी and समाचार and समाज




vara prasad on 11 Feb 2008 at 7:30 pm #
regional politics at present is having its positive and negative aspects. In present day politics, it has more negative aspects than the positive ones. Maharastra is regional politics is doing excesses