ईन्टरनेट कलिकामाः का साम्राज्य
जी हां ! ईन्टरनेट कलिकामाः का साम्राज्य है| और याहां आप उससे बच नही सकते| कलिकामाः कोन है? जी कलिकामाः है, कलियुग में व्याप्त काम वासनाऔं का असुर|चाहे आप किसी भी आयु, लिंग, जाति और धर्म से सम्बन्षित हैं यदि आपने ईन्टरनेट सर्फ किया है तो कलिकामा ने आप को दर्शण जरुर दिये होंगे| फिर चाहे आप बनारस के घाट से, प्रवचन देने वाले झटाधारी संत ही क्यों ना हों|
आज शोशल नेटवर्किंग साईटस (यानि समाजिक मेल मिलाप - अतिश्योक्ति होगई) पर ही देख लीजीए, किस प्रकार न केवल नव युवक - युवतियां ही नही, बल्कि समाजिक सत्तर प्राप्त कर चुके स्त्रि पुरुष भी अपनी अपनी कामईच्छऔं की पूर्ती के लिए नऐ समभोगी तलाश रहे हैं| हां भई, मुझे भी ल्लचाती रही है कलिकामा की माया और मैं भी चलने को आतुर रह्ता| पर जब से श्री वासुदेव से मिले हैं उन्होने रस्सी बांध के रोक रखा है वरना मुझमें ईतनी सम्बल शक्ति कहां है जो मैं कलिकामाः की माया का आम्नत्रण ठुकरा सकता|
हां ! ईन्टरनेट कलिकामाः का सम्राज्या है| और मैं उसके साम्राज्य में नगर व्यवस्था हथियाने में लगा हूं| हे राम ! प्राप्र्टी माफिया नही, बल्कि वेब होस्टिगं| हालांकि ज्यादातर अधिकार क्षेत्र अमरीकी कम्पनीयौं के पास है| चलो अपनी कोशिश (कोकिश) भी जारी है|……
February 14 2008 01:45 pm | जीवन and मेरी अपनी and समाज



