देव वानी » ईन्टरनेट कलिकामाः का साम्राज्य
देव वानी

यदि आपने येह् ब्लाग पढा और आपको ईस ब्लाग में व्याप्त आधियात्मिक शक्ति का
आभास भी हुआ, तो आपने दोस्तों को अवश्य बतलाऐं।
अपने दोस्तों और साथीयों को बताने के लिए     यहां कल्कि करें।
क्योंकि ग्यान को अपने तक सिमित रखना भी एक अपराध है।

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ईन्टरनेट कलिकामाः का साम्राज्य

जी हां ! ईन्टरनेट कलिकामाः का साम्राज्य है| और याहां आप उससे बच नही सकते| कलिकामाः कोन है? जी कलिकामाः है, कलियुग में व्याप्त काम वासनाऔं का असुर|चाहे आप किसी भी आयु, लिंग, जाति और धर्म से सम्बन्षित हैं यदि आपने ईन्टरनेट सर्फ किया है तो कलिकामा ने आप को दर्शण जरुर दिये होंगे| फिर चाहे आप बनारस के घाट से, प्रवचन देने वाले झटाधारी संत ही क्यों ना हों|

आज शोशल नेटवर्किंग साईटस (यानि समाजिक मेल मिलाप - अतिश्योक्ति होगई) पर ही देख लीजीए, किस प्रकार न केवल नव युवक - युवतियां ही नही, बल्कि समाजिक सत्तर प्राप्त कर चुके स्त्रि पुरुष भी अपनी अपनी कामईच्छऔं की पूर्ती के लिए नऐ समभोगी तलाश रहे हैं| हां भई, मुझे भी ल्लचाती रही है कलिकामा की माया और मैं भी चलने को आतुर रह्ता| पर जब से श्री वासुदेव से मिले हैं उन्होने रस्सी बांध के रोक रखा है वरना मुझमें ईतनी सम्बल शक्ति कहां है जो मैं कलिकामाः की माया का आम्नत्रण ठुकरा सकता|

हां ! ईन्टरनेट कलिकामाः का सम्राज्या है| और मैं उसके साम्राज्य में नगर व्यवस्था हथियाने में लगा हूं| हे राम ! प्राप्र्टी माफिया नही, बल्कि वेब होस्टिगं| हालांकि ज्यादातर अधिकार क्षेत्र अमरीकी कम्पनीयौं के पास है| चलो अपनी कोशिश (कोकिश) भी जारी है|……

February 14 2008 01:45 pm | जीवन and मेरी अपनी and समाज



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