देव वानी » अप्रैल फूल और भारतीय मुर्खता
देव वानी

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आभास भी हुआ, तो आपने दोस्तों को अवश्य बतलाऐं।
अपने दोस्तों और साथीयों को बताने के लिए     यहां कल्कि करें।
क्योंकि ग्यान को अपने तक सिमित रखना भी एक अपराध है।

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अप्रैल फूल और भारतीय मुर्खता

अप्रैल फूल का दिन मूर्खों का दिन क्यों कहा जाता है? ज्यादतर लोग तो यह जानते ही नही बस भेड चाल में मस्त हैं और भारतीय मुर्खता का प्रदर्शन करने में कोई कसर भी नही छोडते | पहले दर्जे का अधिकार मैं स्वयं को नवाजता हूं बाकी तो महान पुरुष हैं| शीर्षासन कर धरती का भोझ उठाना मेरी महानता में शामिल है| अकेला मुर्ख कुछ ज्यादा प्र्चण्ड प्रल्य नही ला सकता ईस लिए जो व्यक्ति धरती का भोझ उठाना चाहते हो वे मेरे साथ होलें| सभी को खुला आमन्त्रण है|

बात यूं है भईऐ कि आधुनिक कैलैन्डर के प्रचलन में आने से पहिले पश्चिमी लोग भी अप्रैल मास को ही नव वर्ष मनाते थे| फिर ईसाई कैलैन्डर को प्रचलित करने हेतु यह धारणा स्थापित की गई की जो लोग पहिली जनवरी की बजाए अप्रैल में नव वर्ष मनाएगे वे मुर्ख कहे जाने चाहिए| और तबसे अप्रैल में नव वर्ष मनाने वालों को मुर्ख कहा जाता है जिसे हम सब भारतीय बडे हर्षो उल्लास से फूलस डे के रुप में मनाते हैं| तो लो भईऐ हम सब तो १३ अप्रैल को ही नव वर्ष मनाने वाले हैं और मेरा तो जनम दिन ही १३ अप्रैल के दिन का है | क्या कह्ते हो? अप्रैल फूलस डे या फिर भारतीय फूलस डॅ!

आज कल टीवी पर एक कच्छे का विग्यापन भी तो चल रहा है जिसमें बार बार उस (अंग्रेजी शब्द) गाली को उचारा जाता है जिसे कोई भद्र पुरुष सुन नही सकता| पर हम गांधी जी के अहिंसावादी होते होते नपुन्सक कब हो गऐ पता ही नही चला| ये ही नही एक व्यक्ति तो दिन रात नोकरी की वेब साईट को प्रचारित करने के नाम पर भगवान हरि के नाम को ही गालियां देता चला जाता है| और नपुन्सकों को कोई फर्क भी नही पडता| ऐक वो दो अग्रेंज थे जो रोज टीवी पर आ कर ऐलान करते थे कि अग्रेंज चले गऐ और हमें……| और नपुन्सकों कोई फर्क नही पड्ता| चकदे ईण्डिया में वो हरियाण्वी लड्की बार बार कहे थी कि “भैंस की पूंछ” | एक दिन एक बच्चा पूछ रहा था की ईस बात का क्या मतलब हुआ| कहीने वाले कह गए कि भईऐ जरा किसी दिन किसी हरियाण्वी को छेड कर देख ले फिर तुझे ईसका कलीयर वर्ज़न भी सुनने को मिल जाएगा|
ऐ! अभी खत्म नही हुआ …….. फिल्म अभी बाकी है मेरे दोस्त!

April 01 2008 02:00 pm | जीवन and समाज and हंसी मजाक



One Response to “अप्रैल फूल और भारतीय मुर्खता”

  1. hitesh on 03 Apr 2008 at 10:17 am #

    ye to pehali baar suna meine. if its true ? mein to kabhi bhi April Fools day nahi manaunga. Or lets start celebrating Jan 1 as Fools day. It is a big insult to Hindus.

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