कलयुग का अगला चरण
कलयुग का अगला चरण
पिछले साल मुझे बहुत ही अधभुत आधियातमिक अनुभुतियां हुई| मैने पहिले पहिले तो अधियात्मिक अनुभुतियों को केवल एक मानसिक अनुभुति मानने का बडा प्रयास किया| परन्तु ईस प्रयास में, मैं असफल रहा | जब जब मैं ईस स्थिति को केवल कलपनिक मात्र मानने का प्रयास करता तब तब उसे प्रमानित कर मेरे सामने ला दिया गया | उन स्थितियों को तो वर्णन नही किया जा सकता पर मेने यह विचार करते हुए कि ईन आधियात्मिक स्थितियों में जो संदेश प्राप्त हुए उनको संसार में जन मानस तक पहुंचाने के लिए मुझे चुना गया है| ईसके लिए कभी मैं डाकिया बन लोगों तक संदेश पहुंचाने का पर्यास करता कभी लाऊड्-सपीकर बन संदेश वाचक बनने का प्र्यास करता और कभी प्रिन्टर बन उन संदेशों को आपके लिए मुद्रित करता| और ईस डाकिए ने कुछ संदेश गलत पते पर भी छोड दिए| एक संदेश जो मुझे २००७ (2007) अक्तुबर मास के अन्त में मिला था कि किसी व्योव्रिद्ध संत के जीवन मे केवल कु्छ समय ही शेष बचा है|मैने वह संदेश क्रिपालु जी तक पहुंचा दिया| जिसके लिए मैं क्षमा मांगता हूं| परन्तु जब जनवरी २००८ (2008) में अचानक टीवी पर महार्षि महेश योगी जी के निधन की खबर सुनी तो मुझे उस संदेश की सत्यता का आभास हुआ| यदपि महार्षि महेश योगी जी को मैने अधिक नही सुना पर कहीं न कहीं (१० १२ वर्ष पहिले) मेरी आस्था के सथम्भों को उनके विचारों से बल मिला था| वो वैदिक विश्व की कलप्ना और संकल्प, दैविक बल है| महार्षि महेश योगी जी के निधन के पश्चात आकाशवानी (रेडीयो नही) से संदेश प्राप्त हुआ कि कालचक्र की जो गति तेज़ हुई है उससे मानवो का जीवनकाल एक दिन और घट गया है और कलयुग का अगला चरण शुरु हो गय है|
April 21 2008 03:17 pm | आस्था and जीवन and धरती and मेरी अपनी



