मैं ब्लागर नही हूँ!
मैं ब्लागर नही हूँ! और ना ही बलागर बनना मेरा उदेष्य है। हलांकि ब्लाग लेखन आपको महान लेखक बना सकता है। पर महान लेखक हो जाना या कहिलाना मेरे लिए पतन है। ईस लिए लेखन जगत का शिखर मेरा उदेश्य नही। (लेखकों के लिए - क्रिप्या “दूर के अंगुर खट्टे” वाक्य कह कर मन शांत करें
और दुसरा विचार पढ लेखन के क्षेत्र में सफ़लता की और् बढें ।) मैं समाज में परिवर्तन का साक्षी हूँ। और अपनी वानी और अपने लेखन के माध्यम से परिवर्तन का सुत्रधार बनने का प्र्यास कर रहा हूँ । ईस मानसिकता का कोई कापी राईट नही है हो सके तो ईसे चुरा लो। और दुसरा विचार येह है कि लेखन यदि सुद्रिढ् और शस्खत ना हो तब तक वह एक तेजधार रहित तलवार की तरह है। अर्थात कमजोर लेखन की तलवार द्वारा समाज में व्याप्त और सम्रिध्द हो रहे अराजकता के राक्षष का वध नही हो सकता। कु्छ लोग सोच रहे होंगे की ऐसी तलवारें चलाने वाले बोहोत आये और चले गये पर अब तक तो कोई परिवर्तन ना हुआ? मेरे भाई यदि वे लोग जिन्होने पुर्व में प्रियास ना किये होते तो आज जो येह समाज शेष है वह भी ना देखने को मिलत। ईस लिए उठो और मेरि मानसिकता चुरा लो। लोटाने वाले का और ईस मानसिकता ढूंढ कर लाने वाले को विषेश धन्यावाद।
May 10 2008 05:37 pm | जीवन and मेरी अपनी and समाज



