कैसे पाऊं प्यारे घनश्याम को !!
भगवान से प्यार करना आसान है,
पर भगवान के प्यार को सहन करना आसान नही।
!! कैसे पाऊं प्यारे घनश्याम को !!
नाथ कण कण में देते प्यार,
ईक ईक कण गंगा बने,
गंगा से तन मन भीगे,
कैसे बांधू गंगा प्रवाह् को।
ईक कण प्यार सहा ना जाए,
कैसे पाऊं प्यारे घनश्याम को,
ईधर भागूं कि उधर जाउं,
कैसे समेटूं गंगा प्रवाह् को।
………..परम लौ
गंगा नदी पर बाध बांधने की मुर्खता?
गंगा ना बंधी है, ना बंधेगी| ऐसी मुर्खता को जितनी जल्दी त्याग दो उतना ही अच्छा है|
May 21 2008 05:18 pm | आस्था and कविताऍं and जीवन and मेरी अपनी




