संवेदना धारण करो
संवेदना धारण करलो! जी हां संवेदना बहुत आवश्यक है, पर कैसी संवेदना धारण करने के लिए बोल रहा हूं? बस ईसका उत्तर डूढ रहा हूं| अपने आध्यात्मिक अनुभवों को वेब पर प्रकाशित कर रहा हूं और यह मान कर चल रहा था कि कोई नही तो कम से कम आस्थावान व्यक्ति तो ईसका लाभ उठावेंगे| और मैने सोचा क्यों ना जननी को भी ईन आध्यत्मिक अनुभवों की अनुभुती करवाई जाए| कई दिनो के आवाहन के बाद मां ने आज विडीओज देखे और देव वानी पढी| मैने सोचा, मां तो पहिले से ही कितनी आस्थावान है और वह ये सब देख पढ कर, भक्ति भाव में आन्दित होंगी, पर मेरी आशा के विपरीत, मां ने मुझे ही शाबाश दे डाली| और शब्दॉं की मुद्राऑ में त्रुटियां बतलाने लगी| फिर मां ने कहा देव वानी कहां है वो तो पढा दे| येह देख कर मन थोडा दुखी अवश्य हुआ और मैं सोचने लगा कि क्या सभी मानव ईस प्रकार ही माया से भ्रमित हैं| जरा सोचो श्री नाथ जी के उस वचन का क्या होगा जब उन्होने कहा की “मैं जब चाहूंगा, तो मेरा संदेश तुम्हे गधे की पीठ पर भी लिखा हुआ मिलेगा और तुम्हारा मार्ग प्रदर्षित करेगा”|
अब मैं सोच रहा हूं क्या आस्थावान लोग भी भ्रमित ही रहेंगे|
June 22 2008 01:00 pm | आस्था and जीवन and मेरी अपनी and समाज




Advocate Rashmi Saurana on 22 Jun 2008 at 2:32 pm #
bhut aacha lekha likha hai. likhate rhe.