देव वानी » गाय हमारी माता है तो बैल..? अल्पविराम, ये सुनो…
!! हरि कृष्णा हरि कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरि हरि हरि राम हरि राम राम राम हरि हरि !!
देव वानी

यदि आपने येह् ब्लाग पढा और आपको ईस ब्लाग में व्याप्त आधियात्मिक शक्ति का
आभास भी हुआ, तो आपने दोस्तों को अवश्य बतलाऐं।
अपने दोस्तों और साथीयों को बताने के लिए     यहां कल्कि करें।
क्योंकि ग्यान को अपने तक सिमित रखना भी एक अपराध है।


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गाय हमारी माता है तो बैल..? अल्पविराम, ये सुनो…

गाय हमारी माता है तो बैल..? अल्पविराम, ये सुनो…

भाग - २ (Part 2)

CERN Geneva - World’s Biggest Atom Shmasher Experiment

http://Guardian.co.uk/NEWS/blog/2008/sep/07/1

बहुत दिनो के बाद समय निकाल पाया ईस लेख के लिये| अभी भी कल की “कल्कि” खबर दिमाग में घूम रही है| शायद आपने भी सुनी होगी कि कुछ विग्यानिक फ्रांस और सविटज़र (स्विटज़ृलैंड) के पास के ईलाके जीनीवा में १०० फुट नीचे ज़मीन के अन्दर एक बडा ही संवेदनशील प्रयोग करने जा रहे हैं| कुछ विग्यानी तो ईस प्रयोग को ईतना भयंकर बता रहे है कि Geneva Experiment September 2008 or Doom trigger
जरा सी गलती हुई कि सारा का सारा ब्रहमाण्ड ही स्वाहः हो जाएगा| भला फिर ऐसे लोगों को सम्मानीय उपाधि किस नामाकूल ने दी| ऐसे लोगो तो, ओसामा बिन लादेन से भी परे के आतंकवादी हुए| ये तो अपनी दिमागी खुजली शान्त करने के लिए पूरी की पूरी मानव और जीव संपदा को ही काल की भेट चढाने पर उतारु हैं| यदि कोई बच्चा हाथ में तांबे की तार लिए विद्धयुत (बिजली) के पलग में डालने जा राहा हो, तो उसे तो आप डाट कर रोक सकते हैं, पर यदि यही कार्य कोई सनकी विग्यानी (वो भी एक दो नही, असी देशों के, पूरे पचीस सौ, पागलों की तादात कभी ज्यादा नही होनी चाहिए वैसे तो एक आद भी प्रलय लाने का कारण बनने की काबलियत लिए होता है) मानवता की भलाई की मीठी गोली दे कर अपनी दिमागी खुजली शान्त करने के लिए भयंकर प्रयोग करने पर उतारु हो तो बस केवल रब ही मालिक है| अब तो बस केवल, श्रीनाथ जी ही, धरती को वीनाश से बचा सकते हैं|
शायद आपने भी मेरा वो वीडीओ देखा होगा गाड्स मैसेजिस फार दिस वर्ल्ड जुलाई २००८ (God’s messages for this World 2008) | मैं सोच रहा था कि, डू नाट ट्राई टू चैलेंज डीवीनीटी विद टैक्नोलोजी (”Do not try to challenge Divinity with technology”) वाले मैसेज का पूर्णाथ क्या हो सकता है? उससे पहिले श्रीनाथ जी ने कहा, कि टैक्नोलोजी एक छल्ले की तरह है विग्यानीयों को लगता है कि वे नई दिशा में अग्रसर हो रहे हैं पर वास्तव में वे एक छल्ले की परीधी में घुमं रहे हैं| फिर, श्रीनाथ जी ने कहा, टैक्नोलोजी तुम्हे परमात्म ज्योती की और प्रेरित होने में बाधक है| तो लीजीए, गेंद अब मानवों के पाले में आ गिरी या तो भगवान श्री की और् अग्रसर हो जाओ या फिर प्रल्य में डूब मरो| पार्टी ईज़ ऑन.. गेम ईज़ ओपन..

मिस्त्री संतोश और दिहाडीदार मजदूर मुन्नालाल, ये दोनो गोरखपुर्, उत्तरप्रदेश के रहीने वाले हैं, पर आज कल मोहाली (पंजाब) में रह रहे हैं| मुन्नालाल ४५ (45) साल का मज़दूर है| १५ (15) साल का जवान और ४५ (45) साल की आयु वाले दिहाडीदार, बूढे कहलाते हैं| ……..फिर फुर्सत में कभी……

September 08 2008 02:11 pm | अनमोल वचन and आस्था and जीवन and धरती and भारत and समाचार and समाज



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