शिवरात्री : भगवान की शादी की सालगिरह
शिवरात्री : भगवान और प्रकृति की शादी का पर्व

आज रात को हिंदु, दुनिया भर में शिवरात्री मनाते हैं| शिवरात्री, भगवान की शादी की सालगिरह के रूप में मनाया जाता है| महादेव शिव शंकर, पृथ्वी के भगवान है| महादेव पृथ्वी के संचालक हैं| हिमालय में कैलाश पर्वत, महाशिव का अपना पसंदीदा वास है| हिंदू (”सनातनी कहना बेहतर है”) इस रात को गृहस्थ समाज की प्रगति के लिए दैविक आशिर्वाद के रूप में मनाने हैं | जब माँ प्रकृति की अभिव्यक्ति में, पार्वती पहाड़ों की बेटी, पतन से बचाने के लिए और उसके पुन्ह दिव्य आभा लोटाने के लिए भगवान विश्ववनाथ से शरण मांगी, उस पर्व को शिवरात्री के रुप में मनाया जाता है| यह भगवान शिव सबसे भावुक भगवान है| जो आसानी से प्रसन्न किया जा सकते है| जिन्हे भक्ति की सरलतम भाव से प्रसंन कर जैसे सांसारिक पुरस्कार के साथ, आप को आशीर्वाद देने के लिए मना लिआ जाता है| वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर है| वह खुदा (स्वंभू) अल्लाह है| वह ज्ञान के प्रकाशस्रोत विद्यमान हैं| वह भगवान है | शिव जो जहर को दिव्य अमृत में बदल देते है| वह हमारे ग्रह पृथ्वी पर भगवानब्रह्मांड के दिव्य स्वारुप की एक छवि है| अगर एक, आदमी एक औरत से शादी करके और संस्कारी बच्चे पैदा करता है| तो वह अनजाने में ही, भगवान शिव की पूजा/आराधना करता है| भगवान शिव जागृत / प्रत्यक्ष भक्ति भाव की अनुपस्थिति में भी, उनको आशीर्वाद देते है| महादेव के लिए यह मायने नहीं रखता है कि तुम अपने को क्या कहते/मानते हो| तुम अपने आप क्रिश्चियन बताओ, तुम खुद को मुस्लिम बताओ, तुम अपने आप को हिंदू बताओ, भोलेनाथ कहिते हैं “तुम मेरे हो”| आज रात हम सबके पिता की शादी सालगिराह है| हर हर महादेव शम्भू!
विनीत स्व विद्यमान भगवान!
आदिशक्ति पार्वती ने महादेव का ह्रदय कैसे जीता?
महान देवी माँ आदिशक्ति, शिव भगवान की पत्नी है. जब शिव तथा आदिशक्ति पृथ्वी पर अवतरित हुए, तो वे फिर से एक दूसरे से शादी करने के लिए निर्दिष्ट रहे हैं| लेकिन यह कोई गारंटी नहीं है कि सब ठीक ठाक सहज ही उनका विवाह होजाता है. इस कहानी में आदिशक्ति पृथ्वी पर पर्वत राजकुमारी पार्वती रूप में है जब वह शिव के प्यार को जीतने की कोशिश करती है. तब नारद जी उन्हे एक मंत्र के रूप में शिव के नाम-ओम नमः शिवाये आह्वान करने के लिए सलाह देते हैं| तो सूरज की गर्मी में, तेज बारिश में, उसकी गर्दन तक की बर्फबारी में पार्वती जी बैठ कर तप करती है और उनके तप के केन्द्रित सत्ता तक अपने आदिप्रेम का नाम दोहराती हैं कठोर तप शिव के दिलद्वारों को खोलता है और वे पार्वती जी से शादी के लिए मान जाते है|
कहानी स्रोत: सनातन सोसायटी
February 23 2009 12:56 pm | अनमोल वचन and आस्था and जीवन and धरती and भारत and समाज


