नाथजी बोलो, हरि जी बोलो
हे नाथजी ! कृप्या बताऍं कि शुद्र वर्ण कौन है, वैश्य वर्ण कौन है?, क्षत्रिय वर्ण कौन है और ब्राह्मण वर्ण कौन है? आर्यों में जातिभेद क्या है?
तो नाथजी कहिते हैं……
“शुद्र सेवक है| शुद्र वह है जो शुद्ता प्राप्ति हेतु सहायक हो| मानवों में स्त्री शुद्र है| ग्रहस्थ आश्रम में पतनी शुद्र है| शिशु पलिका शुद्र है| भाईयों में अनुज शुद्र है और कर्मचारियॉं में सेवक शुद्र है| आचार्यों और शिष्यों की व्यव्स्था में वे प्रस्पर शुद्र हैं| ब्रह्मचारी विधार्थी, आचार्य के प्रति शुद्र है| आचार्य, शिष्य के प्रति शुद्र् है|”
“वैश्य वह सहायक है जो वांछित पदार्थ या सेवाऍ प्रदान करने के लिए धन/मुल्य की या कुछ वस्तु अथवा सेवा प्राप्त करने की ईच्छा रखता है|”
“क्षत्रिय रक्षक है| जो किसी निर्बल को, कर्तव्यभद होकर, संर्क्षण प्रदान करे वह क्षत्रिय है| संतान कि लिए माता-पिता क्षत्रिय है| भाईयों में अग्रज क्षत्रिय है| स्त्री के लिए, पुरूष क्षत्रिय है| वृद्ध के प्रति, युवावान पुरूष क्षत्रिय है| निर्बल के लिए, बलवान क्षत्रिय है| प्रजा के लिए, नगरपति क्षत्रिय है|”
“ब्राह्मण वह है जो जीव कल्याण हेतु, ग्यान का प्रसार करे| शिशु के लिए, शिशुपालिका ब्राह्मण है| ब्रह्मचारी शिश्य के लिए, आचार्य ब्राह्मण है| जडमन के लिए, चेतनमन ब्राह्मण है|ब्रह्माण में सुर्य, ब्राह्मण है| गृहों में, पृथवी/भूमी शुद्र है| खेती, अनाज, फलादि वृक्ष वैश्य हैं| अहिंसक, प्रकृति के प्रति कृत्ग़्य, और संतोशी मानव क्षत्रिय है|”
“ईस व्य्वस्था में, मै स्वयं विद्ध्यमान रहिता हूं| यह ही मेरा यश है| श्रीहरिविष्णुयशसवहाः ||”
April 13 2009 12:11 pm | अनमोल वचन and आस्था and जीवन and धरती and भारत and समाज


