उर्दु शायरी : रवानगी-ए-रुह
रवानगी-ए-रुह
हर कतरा-ऐ-आब में रवानगी है,
ज़र से उठ कर गुलाब होने की,
हर ईनसां पे ईनायत है,
बुलंद-ऐ-ईमान होकर, खुदा हो जाने की।
…………… परम लौ
July 23 2009 09:38 am | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and जीवन and मेरी अपनी


