उर्दु शायरी : रवानगी-ए-रुह

रवानगी-ए-रुह

हर कतरा-ऐ-आब में रवानगी है,
ज़र से उठ कर गुलाब होने की,
हर ईनसां पे ईनायत है,
बुलंद-ऐ-ईमान होकर, खुदा हो जाने की।
…………… परम लौ

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