मैं आम आदमी पार्टी छोड़ रहा हूँ। खुला पत्र अरविन्द केजरीवाल के नाम

खुला पत्र अरविन्द केजरीवाल के नाम

भाई अरविन्द केजरीवाल ,

मैंने टीवी पर NE में दिया आपका भाषण सुना और उससे पाहिले TV news पर फ़ोन की रिकॉर्डिंग भी सुनी जिसमें आप ने योगेन्द्र जी और प्रशांत जी को गलियां दी। मुझे बड़ा ही दुःख हुआ यह सब सुनकर। ये जो भी आप बोले हो उससे यह प्रतीत होता है कि आज अरविन्द केजरीवाल जन लोकपाल के आंदोलन को पूरी तरह भूल चुके हैं। हमारी लड़ाई BJP या Congress या Adani Ambani के साथ नही थी। जन लोकपाल आंदोलन का उदेश्य तो एक नई सुधरी हुई जन कल्याण वाली शासन व्यवस्था को स्थापित करना था। हम एक छत्र राज वाले नेताओं की व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहे थे। जन-स्वराज का सपना तो तब पूरा होता जब हम व्यक्ति भक्ति केंद्रित पार्टीवाद को हरा कर , लोकतान्त्रिक मूल्यों पर चल कर सत्ता में आते।

आप ने ठीक कहा की आप तो केवल चुनाव जितने की राजनीती करने आये हो ना की हार ने की, फिर चाहे आपको जन-लोकपाल की ही हत्या क्यों ना करनी पड़ती, जो आपने आखिर कर ही दी। मेरा ख्याल है की योगेन्द्र यादव जी और प्रशांत भूषण जी यह भांप गए थे कि TV पर अपनी प्रसिद्धि के चलते आप अहंकारी हो गए थे शायद इसी लिए वे दोनों दिल्ली चुनाव हराना चाहते थे ताकि पार्टी को मंथन करने का समय मिले और वो जो जन-लोकपाल के मूल्यों को भूला चुकी है उन्हें वापिस धारण कर सके। आप के अहंकारी हो जाने में थोड़ा दोष आपके चापलूस मित्रों का भी है। कुछ तो आप स्वयं सफलता के नशे में अन्धे होने के कारण सत्य को नही जान पा रहे, कुछ आपके मित्र आपको देखने नहीं दे रहे। वे आपकी हाँ में हाँ मिलाते रहिते हैं। वो तो आपका पल्लू पकड़ कर अपना राजनितिक कैरियर बना रहे हैं। आपकी चुनावी सफलता यह प्रमाणित करती है कि भारत के जन मानस के मन मैं पुरानी दोषपूर्ण व्यवस्था इस प्रकार घर कर चुकी है कि इन्हे जन-लोकपाल आंदोलन का अर्थ समझाने में अभी कहीं अधिक समय लगेगा। जिस दोषपूर्ण व्यवस्था को हटाने के लिए जन-लोकपाल आंदोलन शुरू हुआ था उसी बुराई की नदी में आपने गोता लगा दिया और लोकपाल व्यवस्था की हत्या तो आपने अपनी पार्टी में और अपने ही हाथों कर दी। आप यह नही जान पाये की दोष आपमें आ गया है नाकि उन लोगों में जिन्हे आप गद्दार कह रहे हैं।

आप तो गाते रहिते हो “इन्सान का इन्सान से हो भाई चारा, यही सन्देश हमारा” पर आप तो अपनी पार्टी में ही भाईचारा ना रख सके जो गालियां और द्वेष आपने अपनी पार्टी के प्रति व्यक्त किया वो तो सब जानते हैं। अब यह तो साफ़ हो ही गया है कि आम आदमी पार्टी जन -कल्याण के लिए काम करने वालों की पार्टी ना हो कर केवल एक मित्रों की टोली के राजनितिक स्वार्थों को पूरा करने वाली पार्टी बनकर रह गयी है। मैं यह भी मानता हूँ कि आप जैसा अहंकारी व्यक्ति जन-नायक नहीं हो सकता। इस लिए मैं आम आदमी पार्टी छोड़ रहा हूँ। मैं पाहिले ही की तरह BUYK - भारत उदय युग क्रांति आंदोलन को जारी रख भारतीय समाज में जन-लोकपाल की नई चेतना जगाने का प्रयास करता रहूँगा।

जय हिन्द। जय भारत।

परम लौ

Leave a Reply