Archive for the 'धरती' Category
गाय हमारी माता है तो बैल..? अल्पविराम, ये सुनो…
भाग - २ (Part 2)
CERN Geneva - World’s Biggest Atom Shmasher Experiment
http://Guardian.co.uk/NEWS/blog/2008/sep/07/1
बहुत दिनो के बाद समय निकाल पाया ईस लेख के लिये| अभी भी कल की “कल्कि” खबर दिमाग में घूम रही है| शायद आपने भी सुनी होगी कि कुछ विग्यानिक फ्रांस और सविटज़र (स्विटज़ृलैंड) के पास के ईलाके जीनीवा में १०० फुट नीचे ज़मीन के अन्दर एक बडा ही संवेदनशील प्रयोग करने जा रहे हैं| कुछ विग्यानी तो ईस प्रयोग को ईतना भयंकर बता रहे है कि 
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September 08 2008 | अनमोल वचन and आस्था and जीवन and धरती and भारत and समाचार and समाज | No Comments »
जय श्री क्रिष्णा!
लो, मैं आ गया। जी हाँ! कुछ लोग मेरे प्रतिउत्तर की प्रतीक्षा कर रहे थे! राम सेतु पर सेतुसमुद्रम, मुरारीबापु, प्रिहास करना, गुजरात तथा बैंगलोरु में आतंकवाद का सफ़ल होना, continue reading »
July 29 2008 | आस्था and जीवन and धरती and भारत and मेरी अपनी and समाज | No Comments »
ऐलियन ! प्राग्रही ! दूसरे ग्रह का प्राणी?
जिस दिन भारतीय लोग ऐलियनस के अस्तित्व को स्बिकार लेंगे उस दिन से उनका दुर्भाग्य शुरु हो जाएगा | ईस लिए मेरे प्यारे भारतीयो कभी भी किसी भी तर्क/न्युज या विडीयो continue reading »
June 01 2008 | अनमोल वचन and जीवन and धरती and भारत and समाज | 1 Comment »
ईन्टेरनेट का तीर्थ यहां है| श्री नाथ जी ने कहा continue reading »
May 26 2008 | अनमोल वचन and आस्था and जीवन and धरती and समाचार and समाज | No Comments »
कलयुग का अगला चरण
पिछले साल मुझे बहुत ही अधभुत आधियातमिक अनुभुतियां हुई| मैने पहिले पहिले तो अधियात्मिक अनुभुतियों को केवल एक मानसिक अनुभुति मानने का बडा प्रयास किया| परन्तु ईस प्रयास में, मैं असफल रहा | जब जब मैं ईस स्थिति को केवल कलपनिक मात्र मानने का प्रयास करता तब तब उसे प्रमानित कर मेरे सामने ला दिया गया | उन स्थितियों को तो वर्णन continue reading »
April 21 2008 | आस्था and जीवन and धरती and मेरी अपनी | No Comments »
ईन्द्र्लोक, वसन्त मास पश्चिम देशा तिथी १० फरवरी, सन २००८
माराठी मानसों ने जन्मा क्षेत्रीयवादता का राक्षस |देवता भी डर गये हिन्दुऑ में पनपते क्षेत्रीयवादता के राक्षस से | अब देवतागण ईक्त्र होकर सभा करने में जुटे हैं कि जिस प्रकार देव पुत्र निजी स्वार्थो के चलते क्षेत्रीयवादता के राक्षस को जन्म देकर उसका लालन-पालन करने में जुटे है तो वह स्मय आगया है कि देवताऑ को अपने अपने प्राण continue reading »
February 10 2008 | आस्था and जीवन and धरती and मेरी अपनी and समाचार and समाज | 1 Comment »