Archive for the 'मेरी अपनी' Category
रवानगी-ए-रुह
हर कतरा-ऐ-आब में रवानगी है,
ज़र से उठ कर गुलाब होने की,
हर ईनसां पे ईनायत है,
बुलंद-ऐ-ईमान होकर, खुदा हो जाने की।
…………… परम लौ
July 23 2009 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and जीवन and मेरी अपनी | No Comments »

2 फरवरी,2009
नाथ दीजो नाम मुझे आपनो, मैं बलिहारी जाऊं।
हरि कहे मन हरा होजाए, मैं बलिहारी जाऊं।
जगह जगह नाथ रंग लीपो, मैं बलिहारी जाऊं।
भरमायाजाउं, नाथ बांह पकड खीचं लीजो, मैं बलिहारी जाउं।
………………………………….
………………………………..परम लौप्>
February 02 2009 | आस्था and कविताऍं and मेरी अपनी | No Comments »
भाग - १ (Part 1)
एक बच्चे का प्रश्न भी है कि गाय हमारी माता है तो बैल हमारा पिता क्यों नही कहा जाता?
जिस पर बडे बडे स्तब्ध रह जाते हैं|
बात यह है कि हमारे घर में ग्रह-निर्माण का कार्य चल रहा था| और continue reading »
August 22 2008 | अनमोल वचन and आस्था and जीवन and भारत and मेरी अपनी and समाज | No Comments »
जय श्री क्रिष्णा!
लो, मैं आ गया। जी हाँ! कुछ लोग मेरे प्रतिउत्तर की प्रतीक्षा कर रहे थे! राम सेतु पर सेतुसमुद्रम, मुरारीबापु, प्रिहास करना, गुजरात तथा बैंगलोरु में आतंकवाद का सफ़ल होना, continue reading »
July 29 2008 | आस्था and जीवन and धरती and भारत and मेरी अपनी and समाज | No Comments »
जय बोलो श्रीनाथ की !!
मन ने प्रभु की स्तुति की और वह कविता का रूप ले कर अक्षरों में गड़ गई| यदि आप लोगों में कोई माँ सरस्वती की कृपा से गायक हो तो आप इस सतुति को सुरों से आलंकृत कर सकते हैं| continue reading »
July 13 2008 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and मेरी अपनी | No Comments »
July 09 2008 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and जीवन and भारत and मेरी अपनी | Enter your password to view comments
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