देव वानी » मेरी अपनी
देव वानी

यदि आपने येह् ब्लाग पढा और आपको ईस ब्लाग में व्याप्त आधियात्मिक शक्ति का
आभास भी हुआ, तो आपने दोस्तों को अवश्य बतलाऐं।
अपने दोस्तों और साथीयों को बताने के लिए     यहां कल्कि करें।
क्योंकि ग्यान को अपने तक सिमित रखना भी एक अपराध है।


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Archive for the 'मेरी अपनी' Category

उर्दु शायरी : रवानगी-ए-रुह

रवानगी-ए-रुह

हर कतरा-ऐ-आब में रवानगी है,
ज़र से उठ कर गुलाब होने की,
हर ईनसां पे ईनायत है,
बुलंद-ऐ-ईमान होकर, खुदा हो जाने की।
…………… परम लौ

July 23 2009 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and जीवन and मेरी अपनी | No Comments »

परम लौ लग गई

2 फरवरी,2009

नाथ दीजो नाम मुझे आपनो, मैं बलिहारी जाऊं।
हरि कहे मन हरा होजाए, मैं बलिहारी जाऊं।
जगह जगह नाथ रंग लीपो, मैं बलिहारी जाऊं।
भरमायाजाउं, नाथ बांह पकड खीचं लीजो, मैं बलिहारी जाउं।
………………………………….
………………………………..परम लौ

February 02 2009 | आस्था and कविताऍं and मेरी अपनी | No Comments »

हरे कृष्णा महामंत्रा पल्गईन वर्ड-प्रैस के लिए

वर्ड-प्रैस के लिए हरे कृष्णा महामंत्रा पल्गईन व १.०.८ जारी किया गया है| हरे कृष्णा महामंत्रा पल्गईन डाऊनलोड करने के लिए यहां कलिक करें|

महामंत्रा पल्गईन व १.०.८ का चित्र पटल

महामंत्रा पल्गईन  व १.०.८ का चित्र पटल screenshot of mahamantra plugin for Wordpress by ParamLowe.com
click on image for bigger view

January 12 2009 | आस्था and भारत and मेरी अपनी and वर्ड-प्रैस | No Comments »

प्रश्न : गाय हमारी माता है तो बैल..? (Part 1_भाग - १ )

भाग - १ (Part 1)

एक बच्चे का प्रश्न भी है कि गाय हमारी माता है तो बैल हमारा पिता क्यों नही कहा जाता?
जिस पर बडे बडे स्तब्ध रह जाते हैं|
बात यह है कि हमारे घर में ग्रह-निर्माण का कार्य चल रहा था| और continue reading »

August 22 2008 | अनमोल वचन and आस्था and जीवन and भारत and मेरी अपनी and समाज | No Comments »

भोतिक पागलपन पर मेरी प्रतिक्रिया

जय श्री क्रिष्णा!
लो, मैं आ गया। जी हाँ! कुछ लोग मेरे प्रतिउत्तर की प्रतीक्षा कर रहे थे! राम सेतु पर सेतुसमुद्रम, मुरारीबापु, प्रिहास करना, गुजरात तथा बैंगलोरु में आतंकवाद का सफ़ल होना, continue reading »

July 29 2008 | आस्था and जीवन and धरती and भारत and मेरी अपनी and समाज | No Comments »

जय बोलो श्रीनाथ की !! प्रभु की स्तुति

जय बोलो श्रीनाथ की !!

मन ने प्रभु की स्तुति की और वह कविता का रूप ले कर अक्षरों में गड़ गई| यदि आप लोगों में कोई माँ सरस्वती की कृपा से गायक हो तो आप इस सतुति को सुरों से आलंकृत कर सकते हैं| continue reading »

July 13 2008 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and मेरी अपनी | No Comments »

Protected: जय बोलो श्रीनाथ की !!

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July 09 2008 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and जीवन and भारत and मेरी अपनी | Enter your password to view comments

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