Archive for the 'मेरी अपनी' Category
भाग - १ (Part 1)
एक बच्चे का प्रश्न भी है कि गाय हमारी माता है तो बैल हमारा पिता क्यों नही कहा जाता?
जिस पर बडे बडे स्तब्ध रह जाते हैं|
बात यह है कि हमारे घर में ग्रह-निर्माण का कार्य चल रहा था| और continue reading »
August 22 2008 | अनमोल वचन and आस्था and जीवन and भारत and मेरी अपनी and समाज | No Comments »
जय श्री क्रिष्णा!
लो, मैं आ गया। जी हाँ! कुछ लोग मेरे प्रतिउत्तर की प्रतीक्षा कर रहे थे! राम सेतु पर सेतुसमुद्रम, मुरारीबापु, प्रिहास करना, गुजरात तथा बैंगलोरु में आतंकवाद का सफ़ल होना, continue reading »
July 29 2008 | आस्था and जीवन and धरती and भारत and मेरी अपनी and समाज | No Comments »
जय बोलो श्रीनाथ की !!
मन ने प्रभु की स्तुति की और वह कविता का रूप ले कर अक्षरों में गड़ गई| यदि आप लोगों में कोई माँ सरस्वती की कृपा से गायक हो तो आप इस सतुति को सुरों से आलंकृत कर सकते हैं| continue reading »
July 13 2008 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and मेरी अपनी | No Comments »
July 09 2008 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and जीवन and भारत and मेरी अपनी | Enter your password to view comments
संवेदना धारण करलो! जी हां संवेदना बहुत आवश्यक है, पर कैसी संवेदना धारण करने के लिए बोल रहा हूं? बस ईसका उत्तर डूढ रहा हूं| अपने आध्यात्मिक अनुभवों को वेब पर प्रकाशित कर रहा हूं और यह मान कर चल रहा था कि continue reading »
June 22 2008 | आस्था and जीवन and मेरी अपनी and समाज | 1 Comment »

भगवान से प्यार करना आसान है,
पर भगवान के प्यार को सहन करना आसान नही। continue reading »
May 21 2008 | आस्था and कविताऍं and जीवन and मेरी अपनी | No Comments »
मेरी अपनी कविता “प्यारा सा लम्हा” मेरी पसंन्दिदा कविता भी है। यहॉं मैं ईस कविता का एक भाग ही मुद्रित् (प्रकाशित्) कर रह हूँ। यह् कविता मैने सन 1999 के अक्तुबर मास् में लिखी थी।
यदि आप ईस कविता को कहीं प्रकशित् करना चाहते हैं तो क्रिप्या मुझे सप्रंक करके मेरी स्वीकारीता प्राप्त् करें। यह बौद्धिक संपति के अधिकार् के अन्तरगत् अनिवार्य है।
!! प्यारा सा लम्हा !!
………………………..Oct 8th, 1999
आज दिल की गहराईयों से,
मन की उमंगो तक,
कोई नाम ढूंढ रहा हूँ,
ईक पहिचान ढूंढ रहा हूँ,
ईक प्यारा सा लम्हा बुन रहा हूँ।
………….. continue reading »
May 19 2008 | कविताऍं and जीवन and मेरी अपनी | No Comments »
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