देव वानी » मेरी अपनी
देव वानी

यदि आपने येह् ब्लाग पढा और आपको ईस ब्लाग में व्याप्त आधियात्मिक शक्ति का
आभास भी हुआ, तो आपने दोस्तों को अवश्य बतलाऐं।
अपने दोस्तों और साथीयों को बताने के लिए     यहां कल्कि करें।
क्योंकि ग्यान को अपने तक सिमित रखना भी एक अपराध है।

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Archive for the 'मेरी अपनी' Category

श्री राम का ह्र्दय

!! श्री राम !!

श्री राम नाम से मिले सुख,
श्री राम नाम से मिले आराम,
श्री राम नाम से मिले शान्ति,
श्री राम नाम से मिटे संताप|

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May 19 2008 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and मेरी अपनी | 1 Comment »

मैं ब्लागर नही हूँ!

मैं ब्लागर नही हूँ! और ना ही बलागर बनना मेरा उदेष्य है। हलांकि ब्लाग लेखन आपको महान लेखक बना सकता है। पर महान लेखक हो जाना या कहिलाना मेरे लिए पतन है। ईस लिए लेखन जगत का शिखर मेरा उदेश्य नही। (लेखकों के लिए - क्रिप्या continue reading »

May 10 2008 | जीवन and मेरी अपनी and समाज | No Comments »

मन भर गया है नेट से

हां ! मन भर गया है नेट से| शायद येह डीप्रेसिव मूड का संकेतक हो पर मैं ऊब चुका हूं नेट से| सारा श्रेय हैकरों को और नेट की मर्ग त्रिष्णा को जाता है| पिछले कुछ दिनो मैं तुर्की के हैकरों ने continue reading »

April 26 2008 | आस्था and जीवन and मेरी अपनी | 1 Comment »

कलयुग का अगला चरण

कलयुग का अगला चरण

पिछले साल मुझे बहुत ही अधभुत आधियातमिक अनुभुतियां हुई| मैने पहिले पहिले तो अधियात्मिक अनुभुतियों को केवल एक मानसिक अनुभुति मानने का बडा प्रयास किया| परन्तु ईस प्रयास में, मैं असफल रहा | जब जब मैं ईस स्थिति को केवल कलपनिक मात्र मानने का प्रयास करता तब तब उसे प्रमानित कर मेरे सामने ला दिया गया | उन स्थितियों को तो वर्णन continue reading »

April 21 2008 | आस्था and जीवन and धरती and मेरी अपनी | No Comments »

मां को याद है भगत सिंघ का शहीदी दिवस

मां को याद है भगत सिंघ का शहीदी दिवस

आज सुबह मैं स्थानीय केबल टीवी पर फ़िल्मी गाने देख रहा था। सुभाष घई की कर्मा फ़िल्म के गाने आ रहे थे। गाना चल रहा था “दिल दिया है जां भी देगें ऐ वतन तेरे लिए, हर करम अपना करेंगें ऐ वतन तेरे लिए… continue reading »

March 20 2008 | आस्था and जीवन and मेरी अपनी and रसोई and समाज | No Comments »

ईन्टरनेट कलिकामाः का साम्राज्य

जी हां ! ईन्टरनेट कलिकामाः का साम्राज्य है| और याहां आप उससे बच नही सकते| कलिकामाः कोन है? जी कलिकामाः है, कलियुग में व्याप्त काम वासनाऔं का असुर|चाहे आप किसी भी आयु, लिंग, जाति और धर्म से सम्बन्षित हैं यदि आपने ईन्टरनेट सर्फ continue reading »

February 14 2008 | जीवन and मेरी अपनी and समाज | No Comments »

दर्पण

यहां पर मैं अपनी कविता “दर्पण” का कुछ भाग ही मुद्रित कर रहा हूं|

चेहरे तो नकाबपोश होते हैं , continue reading »

February 11 2008 | कविताऍं and मेरी अपनी | No Comments »

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