देव वानी » 2008 » April
देव वानी

यदि आपने येह् ब्लाग पढा और आपको ईस ब्लाग में व्याप्त आधियात्मिक शक्ति का
आभास भी हुआ, तो आपने दोस्तों को अवश्य बतलाऐं।
अपने दोस्तों और साथीयों को बताने के लिए     यहां कल्कि करें।
क्योंकि ग्यान को अपने तक सिमित रखना भी एक अपराध है।

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Archive for April, 2008

मन भर गया है नेट से

हां ! मन भर गया है नेट से| शायद येह डीप्रेसिव मूड का संकेतक हो पर मैं ऊब चुका हूं नेट से| सारा श्रेय हैकरों को और नेट की मर्ग त्रिष्णा को जाता है| पिछले कुछ दिनो मैं तुर्की के हैकरों ने continue reading »

April 26 2008 | आस्था and जीवन and मेरी अपनी | 1 Comment »

कलयुग का अगला चरण

कलयुग का अगला चरण

पिछले साल मुझे बहुत ही अधभुत आधियातमिक अनुभुतियां हुई| मैने पहिले पहिले तो अधियात्मिक अनुभुतियों को केवल एक मानसिक अनुभुति मानने का बडा प्रयास किया| परन्तु ईस प्रयास में, मैं असफल रहा | जब जब मैं ईस स्थिति को केवल कलपनिक मात्र मानने का प्रयास करता तब तब उसे प्रमानित कर मेरे सामने ला दिया गया | उन स्थितियों को तो वर्णन continue reading »

April 21 2008 | आस्था and जीवन and धरती and मेरी अपनी | No Comments »

नव वर्ष २०६५ (2065) की आप सबको बधाई हो

नव वर्ष २०६५ (2065) की आप सबको बधाई हो|
भारत विश्व से ५७ (57) वर्ष आगे है| :)

अनमोल वचन

जीवन का सच्चा सदुपयोग ही जीवन का महामंत्र है…….. आदर्श चिंतन श्रेष्ठ है तो आदर्श कर्म श्रेष्ठ्तम|

साधनात्मक पुरुषार्थ थोडा सा ही क्यों ना हो हज़ार बडी-बडी बातों से ज्यादा उत्तम है…. बातों से भावनायें जाग सकती है, किन्तु उस सिद्धान्त की अनुभूति के लिये यदि आवश्यक पुरुषार्थ नही किया गया तो समझो समय ओर भावना बेकार नष्ट हुई|

April 13 2008 | अनमोल वचन and समाचार and समाज | No Comments »

अप्रैल फूल और भारतीय मुर्खता

अप्रैल फूल का दिन मूर्खों का दिन क्यों कहा जाता है? ज्यादतर लोग तो यह जानते ही नही बस भेड चाल में मस्त हैं और भारतीय मुर्खता का प्रदर्शन करने में कोई कसर भी नही छोडते | पहले दर्जे का अधिकार मैं स्वयं को नवाजता हूं बाकी तो महान पुरुष हैं| शीर्षासन कर धरती का भोझ उठाना मेरी महानता में शामिल है| continue reading »

April 01 2008 | जीवन and समाज and हंसी मजाक | 1 Comment »