देव वानी » 2008 » July
देव वानी

यदि आपने येह् ब्लाग पढा और आपको ईस ब्लाग में व्याप्त आधियात्मिक शक्ति का
आभास भी हुआ, तो आपने दोस्तों को अवश्य बतलाऐं।
अपने दोस्तों और साथीयों को बताने के लिए     यहां कल्कि करें।
क्योंकि ग्यान को अपने तक सिमित रखना भी एक अपराध है।


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Archive for July, 2008

भोतिक पागलपन पर मेरी प्रतिक्रिया

जय श्री क्रिष्णा!
लो, मैं आ गया। जी हाँ! कुछ लोग मेरे प्रतिउत्तर की प्रतीक्षा कर रहे थे! राम सेतु पर सेतुसमुद्रम, मुरारीबापु, प्रिहास करना, गुजरात तथा बैंगलोरु में आतंकवाद का सफ़ल होना, continue reading »

July 29 2008 | आस्था and जीवन and धरती and भारत and मेरी अपनी and समाज | No Comments »

जय बोलो श्रीनाथ की !! प्रभु की स्तुति

जय बोलो श्रीनाथ की !!

मन ने प्रभु की स्तुति की और वह कविता का रूप ले कर अक्षरों में गड़ गई| यदि आप लोगों में कोई माँ सरस्वती की कृपा से गायक हो तो आप इस सतुति को सुरों से आलंकृत कर सकते हैं| continue reading »

July 13 2008 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and मेरी अपनी | No Comments »

Protected: जय बोलो श्रीनाथ की !!

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July 09 2008 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and जीवन and भारत and मेरी अपनी | Enter your password to view comments

Protected: श्री हरि विष्णु हैं धर्म के ठेकेदार ||

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July 06 2008 | अनमोल वचन and आस्था and जीवन and भारत and समाचार and समाज | Enter your password to view comments