देव वानी
!! हरि कृष्णा हरि कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरि हरि हरि राम हरि राम राम राम हरि हरि !!
देव वानी

यदि आपने येह् ब्लाग पढा और आपको ईस ब्लाग में व्याप्त आधियात्मिक शक्ति का
आभास भी हुआ, तो आपने दोस्तों को अवश्य बतलाऐं।
अपने दोस्तों और साथीयों को बताने के लिए     यहां कल्कि करें।
क्योंकि ग्यान को अपने तक सिमित रखना भी एक अपराध है।


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Protected: जय बोलो श्रीनाथ की !!

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July 09 2008 | अनमोल वचन and आस्था and कविताऍं and जीवन and भारत and मेरी अपनी | Enter your password to view comments

Protected: श्री हरि विष्णु हैं धर्म के ठेकेदार ||

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July 06 2008 | अनमोल वचन and आस्था and जीवन and भारत and समाचार and समाज | Enter your password to view comments

संवेदना धारण करो

संवेदना धारण करलो! जी हां संवेदना बहुत आवश्यक है, पर कैसी संवेदना धारण करने के लिए बोल रहा हूं? बस ईसका उत्तर डूढ रहा हूं| अपने आध्यात्मिक अनुभवों को वेब पर प्रकाशित कर रहा हूं और यह मान कर चल रहा था कि continue reading »

June 22 2008 | आस्था and जीवन and मेरी अपनी and समाज | 1 Comment »

ऐलियन ! प्राग्रही ! दूसरे ग्रह का प्राणी?

ऐलियन ! प्राग्रही ! दूसरे ग्रह का प्राणी?

जिस दिन भारतीय लोग ऐलियनस के अस्तित्व को स्बिकार लेंगे उस दिन से उनका दुर्भाग्य शुरु हो जाएगा | ईस लिए मेरे प्यारे भारतीयो कभी भी किसी भी तर्क/न्युज या विडीयो continue reading »

June 01 2008 | अनमोल वचन and जीवन and धरती and भारत and समाज | 1 Comment »

ईन्टेरनेट का तीर्थ यहां है

ईन्टेरनेट का तीर्थ यहां है| श्री नाथ जी ने कहा continue reading »

May 26 2008 | अनमोल वचन and आस्था and जीवन and धरती and समाचार and समाज | No Comments »

कैसे पाऊं प्यारे घनश्याम को !!

Shiri Krishna

भगवान से प्यार करना आसान है,
पर भगवान के प्यार को सहन करना आसान नही। continue reading »

May 21 2008 | आस्था and कविताऍं and जीवन and मेरी अपनी | No Comments »

“प्यारा सा लम्हा”


मेरी अपनी कविता “प्यारा सा लम्हा” मेरी पसंन्दिदा कविता भी है। यहॉं मैं ईस कविता का एक भाग ही मुद्रित् (प्रकाशित्) कर रह हूँ। यह् कविता मैने सन 1999 के अक्तुबर मास् में लिखी थी।


यदि आप ईस कविता को कहीं प्रकशित् करना चाहते हैं तो क्रिप्या मुझे सप्रंक करके मेरी स्वीकारीता प्राप्त् करें। यह बौद्धिक संपति के अधिकार् के अन्तरगत् अनिवार्य है।

!! प्यारा सा लम्हा !!
………………………..Oct 8th, 1999

आज दिल की गहराईयों से,
मन की उमंगो तक,
कोई नाम ढूंढ रहा हूँ,
ईक पहिचान ढूंढ रहा हूँ,
ईक प्यारा सा लम्हा बुन रहा हूँ।

………….. continue reading »

May 19 2008 | कविताऍं and जीवन and मेरी अपनी | No Comments »

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