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शायद् नाथ शरन में मिले स्थान ||

हे क्रिष्ण सेवक, अभी मैं ईतना उध्दगम नहि हुआ कि आश्रय श्री क्रिष्ण प्रेम क मागं सकूं मैं तो मागूं शरन प्रभु की, चहून् चरन् शपर्ष प्रभु के, अब तो वो भी नहि मिले, हे सेवक! मुझे याद करो, हे Continue reading शायद् नाथ शरन में मिले स्थान ||

“प्यारा सा लम्हा”

मेरी अपनी कविता “प्यारा सा लम्हा” मेरी पसंन्दिदा कविता भी है। यहॉं मैं ईस कविता का एक भाग ही मुद्रित् (प्रकाशित्) कर रह हूँ। यह् कविता मैने सन 1999 के अक्तुबर मास् में लिखी थी। यदि आप ईस कविता को Continue reading “प्यारा सा लम्हा”